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कर्बला जा रहा हूं मैं नाना / chod kar ab tera astana

छोड़कर अब तेरा आस्ताना
कर्बला जा रहा हूं मैं नाना
अपना वादा है मुझको निभाना
कर्बला जा रहा हूं मैं नाना

सर हथेली पे लेकर चले हैं
भूके प्यासे बहत्तर चले हैं
हश्र में आबे कौसर पिलाना
कर्बला जा रहा हूं मैं नाना

एक सजदा मैं ऐसा करूंगा
जिसको मह़शर में पूरा करूंगा
सर क़यामत के दिन है उठाना
कर्बला जा रहा हूं मैं नाना

हर‌ यजी़दी को आया पसीना
नन्हे असगर ने खोला जो सीना
खा़क में दुश्मनों को मिलाना
कर्बला जा रहा हूं मैं नाना

नात ख़्वां
अजमल रजा़ संभली


About: chod kar ab tera astana karbala ja raha hoon main nana lyrics

छोड़कर अब तेरा आस्ताना, कर्बला जा रहा हूं मैं नाना के यह अशआर अजमल रज़ा संभली की गहरी अकीदत और अहले-बैत की कुर्बानी के जज़्बे को बखूबी बयान करते हैं।

यह क़लाम, इमाम हुसैनؓ की कर्बला की तरफ रवानगी और उनकी अज़ीम शहादत को बेहद असर अंदाज़ में पेश करता है।

सर हथेली पे लेकर चले हैं, भूके प्यासे बहत्तर चले हैं जैसे मिसरे उस अज़ीम सफर की तस्वीर खींचते हैं, जो सब्र, ईमान और अल्लाह के वादे पर यकीन का बेनज़ीर मिसाल है।

एक सजदा मैं ऐसा करूंगा, जिसको मह़शर में पूरा करूंगा जैसी पंक्तियां इमाम हुसैनؓ के उस इरादे को जाहिर करती हैं, जो यज़ीदियत के खिलाफ़ सच्चाई और इंसाफ का पैगाम देता है।

खास तौर पर, नन्हे अली असगरؓ के जज़्बे और दुश्मनों को मिटाने के जिक्र ने इन अशआर को और भी गहराई दे दी है। यह क़लाम सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि कर्बला की दास्तान का एक जज़्बाती तर्जुमा है, जो सुनने वालों के दिलों में अकीदत और ग़म के साथ-साथ इमाम हुसैनؓ के पैगाम को जिंदा कर देता है।