नबी के नूर की बरकत जनाबे ज़ैनब हैं
अली के घर की शराफ़त जनाबे ज़ैनब हैं
खदीजा नानी के चेहरे का अक्स हैं जै़नब
और अपने नाना की सीरत जनाबे ज़ैनब हैं
हसन की आंखों की धंडक हैं उनकी प्यारी बेहन
और अहले बैत की अज़मत जनाबे ज़ैनब हैं
अली के लहजे में दुश्मन से बात करती थी
अली के खु़त्बे की हैबत जनाबे ज़ैनब हैं
हुसैन तेरे लिएं रब ने उस को भेजा था
के कर्बला की ज़रूरत जनाबे ज़ैनब हैं
वो: कर्बला में नज़र आईं मुर्तजा़ की तरह
यजी़दियों पे क़यामत जनाबे ज़ैनब हैं
बचा के लाई है कर्बल से अपने आबिद को
अली की नस्ल पे रह़मत जनाबे ज़ैनब हैं
के उनका ग़म ही बनेगा निजात का ज़रिया
मेरे लिएं मेरी जन्नत जनाबे ज़ैनब हैं
जो बख्श-वाएगी मह़शर में तेरी नस्लों को
वो तेरी फूफी शबाह़त जनाबे ज़ैनब हैं
नबी के नूर की बरकत जनाबे ज़ैनब हैं
अली के घर की शराफ़त जनाबे ज़ैनब हैं
नात ख्वां
मुहम्मद अली फैज़ी
नात nabi ke noor ki barkat janabe zainab hai lyrics का रिव्यू – मोहम्मद अली फैज़ी
मोहम्मद अली फैज़ी की नात “नबी के नूर की बरकत जनाबे ज़ैनब हैं” जनाबे ज़ैनब सलामुल्लाह अलेहा की अज़मत और उनकी बुलंद शख्सियत को बेपनाह मोहब्बत और अदब के साथ बयान करती है। हर मिसरा उनकी शुजात, इज़्ज़त और इस्लाम के लिए दी गई कुर्बानियों की दास्तान सुनाता है। ख़ास तौर पर “अली के घर की शराफ़त जनाबे ज़ैनब हैं” जैसे अल्फाज़, उनके रिश्ते और घराने की अज़मत को नुमाया करते हैं।
इस नात में जनाबे ज़ैनब के बहादुर और बेख़ौफ किरदार का बेहतरीन अंदाज़ में ज़िक्र किया गया है। मिसरे जैसे “अली के लहजे में दुश्मन से बात करती थी” और “यज़ीदियों पे क़यामत जनाबे ज़ैनब हैं” उनकी हिम्मत और मैदान-ए-कर्बला में उनके किरदार की बुलंदी को बयान करते हैं। इसी तरह, “कर्बला की ज़रूरत जनाबे ज़ैनब हैं” का मिसरा उनके मकसद की अहमियत और इस्लाम की कामयाबी में उनके किरदार को रोशन करता है।
नात के आख़िरी हिस्से में जनाबे ज़ैनब को रहमत और निजात का ज़रिया बताया गया है। “उनका ग़म ही बनेगा निजात का ज़रिया” और “मेरे लिए मेरी जन्नत जनाबे ज़ैनब हैं” जैसे अल्फाज़, इमाम हुसैन और जनाबे ज़ैनब की कुर्बानियों को इंसानियत के लिए हिदायत और निजात का रास्ता करार देते हैं। मोहम्मद अली फैज़ी की पुर-असर आवाज़ और खूबसूरत शायरी इस नात को एक लाज़वाल शाहकार बनाती है।