निराली है जो दुनिया से वो शफक़त बाप करता है
अनोखी अपने बच्चों से मोहब्बत बाप करता है
यह बच्चे उम्र भर इसका ही बदला दे नहीं सकते
अकेला एक दिन में जितनी मेह़नत बाप करता है
सभी रिश्ते ही प्यारे हैं मगर औलाद की खा़तिर
किसी से जो नहीं होती वह हिम्मत बाप करता है
नात ख्वां
अज़मत रज़ा भागलपुरी
- reed more गूंजी सदा अल्लाहु अकबर ज़मीन पर / Gunji Sada Jo Allah Hu Akbar Zameen Par | By Tahir Raza Rampuri
यह कलाम बाप की शफक़त और उसकी बेइंतेहा मोहब्बत को खूबसूरती से बयान करता है।
खास मिसरे:
- अनोखी अपने बच्चों से मोहब्बत बाप करता है।
- अकेला एक दिन में जितनी मेहनत बाप करता है,
- यह बच्चे उम्र भर इसका ही बदला दे नहीं सकते।
- सभी रिश्ते ही प्यारे हैं मगर औलाद की खातिर,
- किसी से जो नहीं होती वह हिम्मत बाप करता है।
Conclusion:
नात-ख्वां अज़मत रज़ा भागलपुरी का यह कलाम बाप की फिक्र, मेहनत, और औलाद के लिए उसकी कुर्बानी को बयान करता है। यह कलाम दिल को छूने वाली अक़ीदत और एहसास से भरा हुआ है।