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सरकार का दरवार नहीं देख रहे क्या / Sarkar ka darbar nahin dekh rahe kya | By saif raza kanpuri

सरकार का दरवार नहीं देख रहे क्या
और दरवार में दो यार नहीं देख रहे क्या

कहते हो कि क़ुरान में अबू बक़्र कहां है
तुम आयते फिल्गा़र नहीं देख रहे क्या

सिद्दीक़‌ इमामत पे हैं और मुक़तदीयों में
तुम हैदरे क़र्रार नहीं देख रहे क्या

दूल्हा बने आए हैं अबू बक़्र के घर में
कौ़नैन के सरदार नहीं देख रहे क्या

हर घर नहीं अल्लाह का घर होता मेरे दोस्त
तुम मस्जिदे ज़र्रार नहीं देख रहे क्या

तहसीन अभी हक़ के‌ तरफ दार बहुत हैं
ये मजमए बेदार नहीं देख रहे क्या

नात ख़्वां
सैफ रज़ा कानपुरी

reed more. सरकार के जैसा मेरे सरकार के जैसा | कोई भी नहीं है मेरे सरकार के जैसा / sarkar ke jaisa mere sarkar ke jaisa | by saif raza kanpuri


यह कलाम इश्क़-ए-रसूल ﷺ, सहाबा-ए-किराम की अज़मत और इस्लामी तालीमात को बयां करता है।

खास मिसरे:

  • सरकार का दरबार नहीं देख रहे क्या, और दरबार में दो यार नहीं देख रहे क्या।
  • कहते हो कि क़ुरान में अबू बक़्र कहां है, तुम आयते फिल्गा़र नहीं देख रहे क्या।
  • हर घर नहीं अल्लाह का घर होता मेरे दोस्त, तुम मस्जिदे ज़र्रार नहीं देख रहे क्या।

नात ख़्वां
सैफ रज़ा कानपुरी का यह कलाम मोहब्बत, अकीदत और सहाबा-ए-किराम की अज़मत को बयान करने वाला एक रूहानी नमूना है।